कृषि मंत्रालय ने माना :नोटबंदी की वजह से किसानों को भारी मुश्किलें उठानी पड़ीं

नई  दिल्ली – नोटबंदी की वजह से किसानों को भारी मुश्किलें उठानी पड़ीं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कृषि मंत्रालय ने नोटबंदी के असर पर संसदीय समिति को सौंपी रिपोर्ट में यह बात मानी है। रिपोर्ट के मुताबिक दो साल पहले नोटबंदी की वजह से लाखों किसानों को बीज और उर्वरक खरीदने के लिए नकदी की किल्लत हो गई थी। जमींदारों को भी किसानों को भुगतान करने और बीज खरीदने के लिए परेशानी उठानी पड़ी थी। देश के 26 करोड़ किसान अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए नकदी पर ही निर्भर रहते हैं। सरकार ने 8 नवंबर 2016 को रात 12 बजे से नोटबंदी लागू की थी। इसके तहत 500 और 1000 के पुराने नोटों को चलन से बाहर कर दिया गया था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कृषि मंत्रालय की रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया कि नोटबंदी ऐसे समय लागू हुई जब किसानों के लिए खरीफ की फसल बेचने और रबी की फसल बोने का वक्त होता है। इन दोनों के लिए लेन-देन नकदी में ही होता है। कृषि मंत्रालय के मुताबिक नकदी की कमी की वजह से नेशनल सीड कॉरपोरेशन का भी करीब 1.38 लाख क्विंटल बीज नहीं बिक पाया था।

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