कश्‍मीरी बोले- अब मिली हुर्रियत फरमानों से आजादी, अलगाववादियों के उकसावे पर अब ध्यान नहीं दे रहे लोग

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श्रीनगर। कश्मीर में बदलाव की बयार के बीच अब अलगाववादियों की धमकियों और फतवों के खिलाफ भी लोग खुलकर सामने आ रहे हैं। कल तक उनके इशारे पर सड़कों पर भीड़ उमड़ पड़ती थी अब उनके फरमानों पर आम कश्‍मीरी कान ही नहीं दे रहे हैं। अब न कोई उनके हड़ताली कैलेंडर पर ध्यान दे रहा है और न जिक्र करना पसंद करता है। जिसे पूछो वही कहता है, अब दिल्ली को इनकी दुकान पर बड़ा ताला लगा चाबी झेलम में फेंक देनी चाहिए, तभी वादी में हमेशा के लिए अमन बहाल हो पाएगा।अनुच्‍छेद 370 हटाए जाने के बाद पिछले एक पखवाड़े में पूरी वादी में माहौल तेजी से बदला है। पाबंदियों में जैसे-जैसे ढिलाई दी जा रही है, वादी में सामान्य जनजीवन भी पटरी पर लौट रहा है। ऐसे में अपनी दुकान पर ताला लगते देख हताश अलगाववादी व उनके समर्थक फिर जहर फैलाने की साजिश रच रहे हैं।वह विभिन्न माध्यमों से लोगों को उकसाकर, राष्ट्रीय विरोधी प्रदर्शनों का दौर शुरु करने के लिए हर तरीका इस्तेमाल करने से नहीं चूक रहे हैं। पोस्‍टर के माध्‍यम से धमकियां दी जा रही है और अराजक तत्‍वों के सहारे खुली दुकानों और वाहनों पर पथराव कराने की साजिश रची जा रही है लेकिन आम कश्‍मीरी अब उनके फरमान को मानने से इन्‍कार कर रहे हैं। वहीं, कुछ लोग स्‍वयं सामने आकर सुरक्षा बलों से अराजक तत्‍वों की शिकायत भी कर रहे हैं।श्रीनगर के सौरा इलाके में बुधवार को हुर्रियत समेत कई अलगाववादी संगठनों के साझा संगठन जेआरएल (ज्वाइंट रजिस्टेंस लीडरशिप) ने कुछ पोस्‍टर चिपकाकर कर माहौल बिगाड़ने का प्रयास किया। कंप्‍यूटर से निकाले गए इन पोस्‍टरों में भड़काऊ भाषा का इस्‍तेमाल किया गया था और मार्च निकालने का आह्वान किया था।इससे पूर्व आठ अगस्त को राजबाग इलाके में जेआरएल व एक अन्य संगठन द्वारा हड़ताली कैलेंडर के पोस्टर चिपकाकर फरमान प्रदर्शनों के लिए उकसाया गया। ईद से दो दिन पहले भी डाउन-टाउन और बटमालू में कुछ आपत्तिजनक पोस्टर मिले। पर लोगों ने उनकी तमाम साजिशों की हवा निकाल दी और कोई भी प्रदर्शन करने नहीं पहुंचा। अलबत्ता, कुछ स्थानीय लोग ऐसी साजिशों के बारे में उसी समय पुलिस व सुरक्षा बलों को सूचित कर रहे हैं।राजबाग में तैनात एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि कुछ दिन पहले कुछ स्थानीय लोग ही पोस्टर लेकर हमारे पास पहुंचे। साथ ही ऐसे तत्‍वों से बचाने की गुहार की। हालत यह है कि न किसी ने हड़ताल के उकसावे पर अमल किया और बाजार भी खुले रहे। उन्‍होंने कहा कि यह मेरे लिए बहुत हैरानी की बात थी। पहले इस तरह के पोस्टर तक हटाने में हमें खासी मशक्‍कत करनी पड़ती थी।

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