जानें कौन हैं रॉकेट वूमन ऑफ इंडिया, जिन्हें मिली थी मिशन की जिम्मेदारी

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नई दिल्ली। Chandrayaan-2 के लैंडर विक्रम से संपर्क टूटने पर लोगों को निराशा जरूर हुई है, लेकिन इसरो का हौसला बुलंद है। देश के राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक ने चंद्रयान-2 मिशन के लिए इसरो की प्रशंसा की है। इस मिशन की शुरुआती सफलता ने पूरी दुनिया के सामने भारत को गर्वित होने का मौका भी दिया। यहां पर गर्व की एक और भी वजह है। वो ये कि इस मिशन से कई महिला वैज्ञानिक जुड़ी थीं। आज हम चंद्रयान-2 से जुड़ी इसी नारी शक्ति की जानकारी आपको दे रहे हैं।चंद्रयान-2 की मिशन निदेशिका रितू करिधल को बनाया गया। उनके साथ एम वनीता को प्रोजेक्टर डायरेक्टर की भूमिका सौंपी गई। ये कोई पहला मौका नहीं है, जब इसरो में महिला वैज्ञानिकों को इतनी बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई। इससे पहले मंगल मिशन में भी आठ महिला वैज्ञानिकों को प्रमुख भूमिका में रखा गया था। जानते हैं चंद्रयान 2 में प्रमुख भूमिका निभाने वाली महिला वैज्ञानिकों के बारे में। इस पूरे अभियान में 30 फीसद महिला वैज्ञानिक शामिल रहीं।
रॉकेट वुमन ऑफ इंडिया:-इसरो की महिला वैज्ञानिक रितू करिधल चंद्रयान-2 की मिशन डायरेक्टर हैं। उन्हें रॉकेट वुमन ऑफ इंडिया भी कहा जाता है। इससे पहले वह मार्स ऑर्बिटर मिशन में डिप्टी ऑपरेशंस डायरेक्टर रह चुकी हैं। रितू करिधल ने एरोस्पेस में इंजीनियरिंग की पढाई की है। साथ ही वह लखनऊ विश्वविद्यालय से ग्रेजुएट हैं। पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने वर्ष 2007 में उन्हें इसरो यंग साइंटिस्ट अवॉर्ड से सम्मानित किया था। पूर्व में दिए अपने साक्षात्कारों में रितू करिधल ने बताया था कि भौतिक विज्ञान और गणित में उनकी खास रुचि रही है। वो बचपन में नासा और इसरो के बारे में अखबार में छपी खबरों या अन्य जानकारियों की कटिंग काटकर अपने पास रखती थीं। पोस्ट ग्रेजुएशन के बाद उन्होंने इसरो में नौकरी के लिए आवेदन किया और स्पेस साइटिस्ट बन गईं। करीब 21 वर्ष से इसरो में बतौर वैज्ञानिक काम कर रहीं रितू करिधल पहले भी मार्स ऑर्बिटर मिशन समेत कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट पर काम कर चुकी हैं।
मंगल की महिलाएं:-बीबीसी को पूर्व में दिए एक साक्षात्कार में रितू करिधल ने कहा था कि आम मान्यता है कि पुरुष मंगल ग्रह से आते हैं और महिलाएं शुक्र ग्रह से आती हैं। मंगल अभियान की सफलता के बाद लोगों ने महिला वैज्ञानिकों के लिए ‘मंगल की महिलाएं’ कहना शुरू कर दिया। ये सुनकर अच्छा लगता है।
बेस्ट वुमन साइंटिस्ट पुरस्कार हासिल कर चुकी हैं एम वनीता:-चंद्रयान-2 की प्रोजेक्ट डायरेक्टर की जिम्मेदारी इसरो की दूसरी महिला वैज्ञानिक एम वनीता को सौंपी गई है। एम वनीता के पास डिजाइन इंजीनियरिंग का लंबा अनुभव है। वह काफी समय से सेटेलाइट्स पर काम कर रही हैं। वर्ष 2006 में एस्ट्रोनॉमिकल सोसायटी ऑफ इंडिया ने उन्हें बेस्ट वुमन साइंटिस्ट के पुरस्कार से सम्मानित किया था। जानकारों के अनुसार किसी भी मिशन में प्रोजेक्ट डायरेक्टर की भूमिका काफी अहम होती है। अभियान की सफलता की पूरी जिम्मेदारी प्रोजेक्ट डायरेक्टर पर ही होती है। वह पूरे अभियान का मुखिया होता है। किसी भी अंतरिक्ष अभियान में एक से ज्यादा मिशन डायरेक्टर हो सकते हैं, लेकिन प्रोजेक्ट डायरेक्टर केवल एक ही होता है। प्रोजेक्ट डायरेक्टर के ऊपर एक प्रोग्राम डायरेक्टर भी होता है।
क्या है चंद्रयान 2 मिशन:-इसरो का चंद्रयान-2 मिशन बेहद महत्वपूर्ण है। इसमें एक ऑर्बिटर है, विक्रम नाम का एक लैंडर है और प्रज्ञान नाम का एक रोवर है। इस मिशन के तहत भारत पहली बार चांद पर सॉफ्ट लैंडिंग करेगा, जो बहुत मुश्किल होती है। इस पूरे मिशन पर 600 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च होंगे। चंद्रयान-2 का वजन 3.8 टन है। इसे जीएसएलवी मार्क तीन अंतरिक्ष यान के जरिए चांद पर भेजा जाएगा। इसरो को इस मिशन से काफी उम्मीदें हैं। भारत से पहले अमेरिका, रूस और चीन ही चांद की सतह पर अपना यान उतार सके हैं। चंद्रयान-2, 6 या 7 सितंबर को चंद्रमा के दक्षिण ध्रुव के पास लैंड करेगा। भारत अमेरिका, रूस और चीन के बाद चांद की सतह पर यान उतारने वाला चौथा देश होगा। अभी तक किसी देश ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास यान नहीं उतारा।
चंद्रयान-2 मिशन का उद्देश्य:-चंद्रयान-2 उपग्रह, चांद पर पानी और खनिज आदि का पता लगाएगा। ऑर्बिटर अपने पेलोड के साथ चांद का चक्कर लगाएगा। लैंडर चंद्रमा पर उतरेगा और वह रोवर को स्थापित करेगा। ऑर्बिटर और लैंडर जुड़े रहेंगे, जबकि रोवर लैंडर के अंदर रहेगा। रोवर एक चलने वाला उपकरण रहेगा जो चांद की सतह पर प्रयोग करेगा। लैंडर और ऑर्बिटर भी प्रयोगों में इस्तेमाल होंगे।
चंद्रयान-1 मिशन:-इसरो ने इससे पहले अक्टूबर 2008 में चंद्रयान-1 उपग्रह को चांद पर भेजा था। इस उपग्रह को चांद की सतह से 100 किमी दूर कक्षा में स्थापित किया गया था। उस वक्त यह यान भारत के पांच, यूरोप के तीन, अमेरिका के दो और बुल्गारिया का एक पेलोड लेकर गया था। चंद्रयान-1 मिशन दो साल का था। हालांकि खराबी की वजह से वह मिशसन एक साल में ही खराब हो गया था। इसरो का कहना है कि उसने चंद्रयान-1 की कमियों से सबक लेकर चंद्रयान-2 मिशन की तैयारी पूरी की है। इसलिए इसरो को उम्मीद है कि उसका ये मिशन पूरी तरह से सफल रहेगा।

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