लैंडर से क्‍यों टूटा संपर्क कारणों का पता नहीं, चांद की कक्षा में मौजूद है Chandrayaan 2

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नई दिल्‍ली। चांद के साउथ पोल पर लैंडिंग से बस कुछ दूर चंद्रयान 2 का हिस्‍सा लैंडर कहीं गुम हो गया, जिसका अब तक पता नहीं चल पाया है। लैंडर से संपर्क क्‍यों टूटा इसके बारे में भी कोई जानकारी नहीं। वहीं चंद्रयान 2 चंद्रमा की कक्षा में मौजूद हो अपना काम कर रहा है।घोष ने कहा, ‘हालांकि आधे से अधिक सफलता हमें मिल गई है क्‍योंकि अंतरिक्ष में ऑर्बिटर बिल्‍कुल बढ़िया तरीके से काम कर रहा है।’ घोष ने कहा, ‘हम इस बात से अंजान हैं कि संपर्क क्‍यों टूट गया। जबकि आर्बिटर बढ़िया से काम कर रहा है। संभवत: वैज्ञानिक ऑर्बिटर से तस्‍वीरें लेने को कहेंगे। सॉफ्ट लैंडिंग छूटना अधिक बड़ी निराशा नहीं है।’ साथ ही उन्‍होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इसरो वैज्ञानिकों को दिए गए समर्थन की सराहना की।उन्‍होंने आगे कहा, ‘प्रधानमंत्री इसरो की उपलब्‍धि की तारीफ कर रहे थे। हम उम्‍मीद करते हैं कि चंद्रयान 2 हर चीज पर जीत हासिल करेगा। अभी ऑर्बिटर बिल्‍कुल अच्‍छे तरीके से काम कर रहा है।’ वहीं पांडे ने कहा, ‘मिशन के पीछे ढेर सारे उद्देश्‍य थे। संपर्क टूटने का कारण अब तक पता नहीं चला है। हो सकता है बाद में इसकी पड़ताल की जाए। इस मिशन का उद्देश्‍य हमारे तकनीक की क्षमता को जांचना भी था। इस मिशन में एक छोटी सी कमी हो गई लेकिन इससे भविष्‍य में हमें सीख मिलेगी।’ उन्‍होंने प्रधानमंत्री पर निशाना भी साधा और कहा, ‘प्रधानमंत्री को विश्‍वास के साथ बजट बढ़ा देनी चाहिए। वैज्ञानिक भी मनुष्‍य हैं, वे अपने रिसर्च से काफी अधिक जुड़े होते हैं।’शुक्रवार-शनिवार की दरम्‍यानी रात को 1.30 से 2.30 के बीच विक्रम लैंडर को चंद्रमा की सतह पर उतरना था। इसके बाद रोवर प्रज्ञान (Pragyan) सुबह 5.30 से 6.30 के बीच लैंडर से अलग होता। चंद्रमा के साउथ पोल पर सॉफ्ट लैंडिंग की तैयारी से पहले ही इसरो का संपर्क विक्रम लैंडर से टूट गया। चंद्रमा की सतह से 2.1 किमी की दूरी पर लैंडर के साथ संपर्क टूट गया। इस बात की जानकारी इसरो चेयरमैन के सिवन ने दी। 2 सितंबर को चंद्रयान 2 से विक्रम लैंडर सफलतापूर्वक अलग हो गया था। करीब 23 दिनों तक पृथ्‍वी की कक्षा में चक्‍कर काटने के बाद स्‍पेसक्राफ्ट 14 अगस्‍त को चांद की ओर रवाना हुआ। 22 जुलाई को श्रीहरिकोटा में सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से यह मिशन शुरू हुआ था। चंद्रयान 1 के लांच के कुछ दिनों पहले ही सितंबर 2008 में कैबिनेट द्वारा चांद पर भारत के दूसरे मिशन को मंजूरी दी दी गई थी।

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