12 बार दुनिया ने माना ISRO का लोहा, हर बार रचा नया इतिहास

12baarduia

नई दिल्ली। Chandrayaan 2 के लैंडर से भले ही संपर्क टूट गया हो, लेकिन इस मिशन ने अंतरिक्ष की दुनिया में कई उपलब्धियां हासिल की हैं। अब भी चंद्रयान-2 का ऑर्बिटर चांद की कक्षा में सफलतापूर्वक चक्कर लगा रहा है और उससे इसरो का संपर्क बना हुआ है। नए खोजों और जानकारियों की उम्मीदें अब भी बरकरार है। भारत की योजना चंद्रयान 2 के जरिए वो मुकाम हासिल करने की थी, जिसकी हिम्मत आज तक किसी देश ने नहीं की।ये कोई पहला मौका नहीं है, इससे पहले भी कई बार भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) अंतरिक्ष की दुनिया में नया इतिहास रच चुका है। इन उपलब्धियों ने इसरो को दुनिया की सबसे भरोसेमंद स्पेस एजेंसी बना दिया है। यही वजह है कि दुनिया के 32 देश इसरो के रॉकेट से अपने उपग्रहों को लॉच कराते हैं। जानें- कौन सी हैं वो उपलब्धियां जिसने पूरी दुनिया को अचंभित किया?
1. आर्यभट्ट सैटेलाइट:-भारत ने 19 अप्रैल 1975 को अपना पहला उपग्रह आर्यभट्ट (Aryabhata Satellite) लॉच किया था। इसकी लॉचिंग सोवियत यूनियन ने की थी। इसरो को इस मिशन से बहुत कुछ सीखने को मिला और ये अंतरिक्ष अभियानों में उसकी पहली बड़ी कामयाबी थी, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान भारत की तरफ आकर्षित किया।
2. SITE व STEP प्रोग्राम:-वर्ष 1975 से 1976 के बीच इसरो ने अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के साथ मिलकर सैटेलाइट इंस्ट्रक्शनल टेलीविजन एक्सपेरीमेंट (SITE) की शुरूआत की। इसका मकसद देश के 2400 गांवों की दो लाख जनता तक टीवी कार्यक्रमों का प्रसारण कर, उन्हें जागरूक करना था। इसके बाद 1977 में भारत ने नासा के साथ ही सैटेलाइट टेलिकम्युनिकेशन एक्सपेरिमेंट्स प्रोजेक्ट (STEP) की शुरूआत की थी। इसका मकसद संचार प्रणाली को दुरुस्त करना था।
3. Inset-1A लॉचिंग:-भारत ने 10 अप्रैल 1982 को देश का पहला संचार उपग्रह इनसेट-1ए (Inset-1A) लॉच किया था। इसका मकसद देश के कम्युनिकेशन, ब्रॉडकास्टिंग और मौसम संबंधी भविष्यवाणी को बेहतर बनाना था।
4. पहला लॉच व्हीकल:-भारत रत्न व पूर्व राष्ट्रपति डा. एपीजे अब्दुल कलाम ने अंतरिक्ष मिशन के लिए पहला स्वदेशी अंतरिक्ष रॉकेट (लॉच व्हीकल) SLV-3 तैयार किया था। उनकी देखरेख में 1979 में इस रॉकेट का पहली बार परीक्षण किया गया था, जो फेल हो गया था। इसके एक साल के अंदर भारत ने इसी रॉकेट से 1980 में रोहिणी उपग्रह को सफलता से चंद्रमा की कक्षा में प्रक्षेपित किया था। अंतरिक्ष में मौजूदगी दर्ज कराने वाला भारत छठवां देश बन गया था।
5. पहले भारतीय अंतरिक्ष यात्री:-दो अप्रैल 1984 को स्पेस में पहला भारतीय अंतरिक्ष यात्री पहुंचा था। अंतरिक्ष में पहुंचने वाले पहले भारतीय का नाम राकेश शर्मा थे। उन्हें सोवियत यूनियन के रॉकेट सोयुज टी-11 से अंतरिक्ष में भेजा गया था।
6. रिमोट सेंसिंग रॉकेट:-भारत ने 1988 में देश का पहला रिमोट सेंसिंग रॉकेट IRS-1A छोड़ा था। भारत के लिए ये बड़ी कामयाबी थी, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्पेस मिशन में भारत का नाम हमेशा के लिए दर्ज कर दिया।
7. PSLV रॉकेट बनाया:-भारत ने देश में बने पोलर सैटेलाइट लॉच व्हीकल (PSLV) रॉकेट को 15 अक्टूबर 1994 को IRS-P2 को सफलतापूर्वक उसकी निर्धारित कक्षा में पहुंचाया। इसके बाद से पीएसएलवी भारत समेत दुनिया के सबसे भरोसेमंद रॉकेट में शामिल हो गया। इसके बाद भारत ने 2001 में नए जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉच व्हीकल (GSLV) रॉकेट से जीसैट-1 (GSAT-1) उपग्रह लॉच किया था। जीएसएलवी, पीएसएलवी के मुकाबले ज्यादा उन्नत और भरोसेमंद रॉकेट हैं।
8. चांद पर पानी की तलाश:-22 अक्टूबर 2008 को भारत ने PSLV रॉकेट से देश के पहले मून मिशन चंद्रयान-1 को लॉच किया था। चंद्रयान-1 ने 312 दिनों तक चांद से डाटा और तस्वीरें लेकर इसरो को भेजा। इसी मिशन के जरिए भारत ने चांद पर पानी की खोज की थी। भारत ने ही पूरी दुनिया को इसकी जानकारी दी। बाद में अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने भी इसकी पुष्टि की। चंद्रयान-2 इसी अभियान के आगे की कड़ी है।
9. पहली बार में मंगल मिशन सफल:-भारत ने पांच नवंबर 2013 को अपना पहला मार्स ऑर्बिटर मिशन (मंगलयान) लॉच किया था। इस प्रोजेक्ट के साथ ही इसरो पूरी दुनिया में ऐसी पहली स्पेस एजेंसी बन गई थी, जिसने पहले प्रयास में ही मंगल पर पहुंचने में सफलता हासिल कर ली थी।
10. एक साथ 104 उपग्रह का रिकॉर्ड;-इसरो ने 15 फरवरी 2017 को PSLV-C37 रॉकेट के जरिए कार्टोसैट-2 समेत 104 उपग्रहों को एक साथ अंतरिक्ष में लॉच किया था। इतनी ज्यादा संख्या में एक साथ सैटेलाइट लॉच करने वाला भारत इकलौता देश है। भारत का ये रिकॉर्ड अब भी बरकरार है। इसने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया था।
11. खुद बनाया लैंडर-रोवर:-भारत को पहले रूस की मदद से 2013 में चंद्रयान-2 मिशन लॉच करना था। इसके लिए नवंबर 2007 में ही इसरो और रूसी अंतरिक्ष एजेंसी रॉसकॉसमॉस के बीच अनुबंध हो चुका था। रूसी एजेंसी ने इसरो को चंद्रयान-2 मिशन के लिए लैंडर देने का वादा किया था। 2008 में भारत सरकार ने भी अभियान को हरी झंडी दे दी थी। वर्ष 2009 में चंद्रयान-2 का डिजाइन भी तैयार कर लिया गया था। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार चंद्रयान-2 की जनवरी 2013 में लॉचिंग होनी थी, लेकिन रूसी अंतरिक्ष एजेंसी ने अंतिम क्षणों में लैंडर देने में असमर्थता जता दी। इसके बाद इसरो वैज्ञानिकों ने अपना लैंडर-रोवर विकसित कर लिया। साथ ही उन्होंने चंद्रयान-2 में किसी दूसरे देश की मदद न लेने का भी फैसला लिया।
12. सर्जिकल स्ट्राइक:-उरी आतंकी हमले (URI Terror Attack) के बाद भारत ने पाकिस्तानी सीमा में घुसकर पहली बार सर्जिकल स्ट्राइक (Surgical Strike) की। इसरो ने इस अभियान में सेना की काफी मदद की। इसरो के उपग्रहों की मदद से ही आतंकियों के ठिकानों का पता लगाया गया था। हमले के बाद इसरो की सैटेलाइट से ही लाइव तस्वीरें मंगाई गईं थीं। पुलवामा आतंकी हमले (Pulwama Terror Attack) के बाद बालाकोट सर्जिकल स्ट्राइक (Balakot Surgical Strike) में भी इसरो ने इसी तरह अहम भूमिका निभाई थी।

About Sting Operation

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

themekiller.com