इन टिप्स से मजबूत बनाएं शरीर की Immunity, पढ़ें- एक्सपर्ट की राय

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कोरोना वायरस (कोविड 19) से दुनिया के आधे से ज्‍यादा देश प्रभावित हैं। भारत में भी इसके मामले बढ़ रहे हैं। यह देखा जा रहा है कि कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों के इस तरह के वायरस से कहीं जल्‍दी संक्रमित हो जाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी बीमारी का वायरस शरीर पर तभी हमला कर पाता है, जब हमारी रोगों से लड़ने की क्षमता (जिसे रोगप्रतिरोधक क्षमता भी कहते हैं) कमजोर होती है। रोगप्रतिरोधक क्षमता शरीर के लिए रक्षा कवच की तरह काम करती है, जिसके कमजोर होने पर ही वायरस या बीमारी रूपी दुश्मन शरीर में प्रवेश कर पाते हैं। जानें क्‍या कहते है दिल्ली के डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल के डॉ. राजेश तनेजा।मौसम बदलने पर होने वाला फ्लू ही नहीं, टीबी और कैंसर जैसी बीमारियों की वजह भी कमजोर इम्यूनिटी या रोगप्रतिरोधक क्षमता को माना गया है। हालांकि यह बात सदियों से कही जा रही है कि मजबूत शरीर ही बीमारियों से बचाव कर सकता है, लेकिन मौजूदा परिप्रेक्ष्य में जबकि दुनिया के तमाम देशों के साथ-साथ भारत में भी कोरोना का असर बढ़ रहा है, एक बार फिर इंसान की रोगप्रतिरोधक क्षमता मजबूत होने/बढ़ाने की जरूरत पर चर्चा शुरू हो गई है। यह तो तय है कि आहार, व्यवहार और जीवनशैली ने हम सबकी इम्यूनिटी को प्रभावित किया है, जिसकी वजह से पहले ही अपेक्षा बीमारियों का हमला जल्दी हो जाता है और ठीक होने में भी उनता ही समय लगता है। लेकिन अगर बहुत छोटे-छोटे लेकिन जरूरी प्रयास आहार और व्यवहार में शामिल कर लिए जाएं तो कोरोना ही नहीं, अन्य कई तरह के वायरल फ्लू, संक्रामक और गैर-संक्रामक बीमारियों से बचा जा सकता है, जिसका राज हमारे किचेन और किचेन गार्डन में मौजूद है।
एक नजर रसोई पर : किचेन का वार्डरोब खोलिए और एक नजर मसालों के डिब्बों पर डालिए, मेथीदाना, सरसों, हींग, राई, पंचपूरन सहित अदरक और लहसुन जैसे आम दिनचर्या में इस्‍तेमाल किए जाने वाले मसाले बेहतरीन इम्यून बूस्टर या रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने वाले कहे जा सकते हैं। इन सभी का प्रयोग हमारे रोज के खाने में तो होता है, लेकिन औषधीय रूप से इनका प्रयोग भिन्न-भिन्न तरीके से किया जाए तो ये कहीं अधिक कारगर हो सकते हैं। अदरक का सेवन मौसम के साथ होने वाले वायरल संक्रमण से बचाता है। मेथीदाना कैंसररोधी है। पंचपूरन का इस्तेमाल ही रोगों से लड़ने के लिए किया जाता है। मसालों के अलावा फल व सब्जियों के रूप में भी कई पौष्टिक विकल्प प्राकृतिक रूप से रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने में कारगर साबित हुए हैं। नीबू, चुकंदर, संतरा, खीरा, बादाम, अखरोट के अलावा मौसमी फल अमरूद और कीवी का नियमित सेवन बीमारियों को नजदीक नहीं आने देगा। विशेषज्ञों का एक बड़ा समूह अब इलाज के साथ ही संक्रमण और बीमारियों से बचाव की पैरवी करने लगा है, जो महंगे इलाज से कहीं अधिक बेहतर है।
कुछ साधारण उपाय :
-बीटरूट या चुकंदर का जूस है खून बढ़ाने में कारगर
-ग्रीन टी और लेमन टी भी इम्यूनिटी मजबूत करने में कारगर है
-मौसमी फल संतरा और आंवले का मुरब्बा हो सकता है बेहतर विकल्प
-नीबू और दही है विटामिन सी का भरपूर स्रोत, इन्हें नियमित भोजन में करें शामिल
-चीकू और कीनू है गुणों से भरपूर। कीनू विटामिन सी का बेहतर प्राकृतिक विकल्प कहा जा सकता है
-जीरा और अजवाइन है इम्यून बूस्टर। साधारण पानी में उबाल कर इन्‍हें छानकर पीने से किसी मौसम में वायरल का संक्रमण नहीं होगा
क्या कहते हैं विशेषज्ञ;-एलोपैथी में इम्यूनिटी मजबूत करने के कई विकल्प हैं। विटामिन सी और विटामिन बी 12 टैबलेट्स को काफी समय से इम्यून बूस्टर माना गया है। हमारे पास अब ऐसे कई स्वस्थ मरीज आते हैं जो नियमित स्वास्थ्य जांच के बाद अपनी सेहत को लेकर संजीदा होते हैं। ऐसा 40 साल की उम्र के बाद वाले लोगों में अधिक देखा जा रहा है। हालांकि बुजुर्गों को मौसम बदलने के साथ हमला करने वाले संक्रमण से बचाने के लिए वैक्सीग्रिप इंजेक्शन लगाने की सलाह दी जाती है, जो फ्लू के स्टेन के आधार पर बनाए जाते हैं। हर साल बाजार में आने वाले वैक्सीग्रिप वैक्सीन बदले स्टेन के साथ लांच किए जाते हैं, जिससे वायरस के संक्रमण के खिलाफ शरीर में अप्राकृतिक रक्षा कवच तैयार किया जा सकता है। डॉ. राकेश तनेजा, जनरल फिजिशियन, राममनोहर लोहिया अस्पताल, दिल्‍ली
होम्योपैथी भी सहायक:-दिल्‍ली के केंद्रीय होम्योपैथी शोध संस्थान के डॉ. आरके मनचंदा ने बताया कि होम्योपैथी में रोगप्रतिरोधक क्षमता मजबूत करने के बेहतर विकल्प मौजूद हैं। सबसे पहले तो यह भ्रम दूर करना है कि यह पैथी बहुत धीरे काम करती है। किसी भी साधारण दवा की तरह होम्योपैथी में भी वायरोलॉजी यानी विषाणुविज्ञान का अध्ययन किया जाता है, जिसके आधार पर डाल्यूशन बनाया जाता है। यह दो से तीन घंटे में असर दिखाना शुरू कर देती है। साधारण इंफ्लूएंजा या इम्यूनिटी मजबूत करने के लिए होम्योपैथी में अार्सेनिक अल्बुम 200, यूपिटोरियम 200 और चायना 200 का एक साथ सुबह, दोपहर और शाम को सेवन किया जा सकता है। इसके दस मिनट बाद बेलाडोना 200 और रस्कटास्क 200 का तीनों समय सेवन किया जाना चाहिए। रात में सोते समय केवल नक्सवानी 200 का सेवन आपको किसी भी तरह के संक्रमण और बीमारी से बचा सकता है। हालांकि ये सभी दवाएं सुरक्षित हैं, बावजूद इनके सेवन से पहले अपने चिकित्सक से परामर्श लेना उचित होगा। बेलाडोना गले में खराश और सूखेपन को दूर करता है। रात्रि में ली जाने वाली नक्सवानी रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत करती है।
सदियों पुराना रामबाण इलाज;-दिल्‍ली के अखिल भारतीय आयुर्वेद शोध संस्थान के पंचकर्म विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. संतोष कुमार भट्टड ने बताया कि लाइफ कोच और मेडिटेशन विशेषज्ञ ने बताया कि आयुर्वेद में सबसे पहले रोगप्रतिरोधक क्षमता के विषय को परिभाषित किया गया, क्योंकि यहां केवल बीमारी का नहीं बल्कि रोगी के आचार, विचार और व्यवहार का भी इलाज किया जाता है। पंचकर्म प्रक्रिया टॉक्सिन या रासायनिक तत्वों को निकालकर शरीर को मजबूती प्रदान करती है। जड़ी-बूटियों और औषधीय पौधों से तैयार च्‍यवनप्राश को सदियों से बीमारियों से लड़ने का रामबाण माना गया है। त्रिफला, अश्वगंधा, आंवला का प्रयोग इम्यूनिटी मजबूत करता है। अब यह बात लोगों को समझ में आने लगी है और अधिकतर लोग सप्ताह भर तनाव भरा काम करने के बाद वीकेंड पर पंचकर्म कराने के लिए आते हैं।
ध्यान बढ़ाता है इम्यूनिटी:-अमरजीत सिंह, लाइफ कोच और मेडिटेशन विशेषज्ञ ने बताया कि पांच मिनट आंख बंद करके बैठने को ध्यान नहीं कहा जा सकता, यदि नियमित ध्यान का अभ्यास किया जाएं, तो शरीर की सभी इन्द्रियों को साधा जा सकता है। सांस को नियंत्रित किया जा सकता है। मानसिक स्वास्थ्य से शारीरिक स्वास्थ्य का गहरा ताल्लुक होता है। दरअसल, रक्त में मौजूद सफेद रक्त कणिकाओं की संख्या से भी व्यक्ति की रोगप्रतिरोधक क्षमता की स्थिति का पता लगाते हैं, जिसके कम होने पर ही आसानी से कैंसर का भी हमला हो सकता है, जबकि लाल रक्तकणिकाएं हीमोग्लोबिन तथा प्लेटलेट्स खून के जमने में कारगर हैं। इन तीनों का अपना महत्व है। ध्यान में सभी इंद्रियां नाभि में केंद्रित होती हैं, जिसे शरीर का केंद्र बिंदु भी माना गया है। ध्यान के प्रारंभ के दस मिनट के बाद मनुष्य सबकांसियस अवस्था में चला जाता है, जहां से तनाव के कारक प्रोटीन का स्तर कम होने लगता है। नियमित अभ्यास के बाद तनाव का स्तर जीरो से माइनस हो जाता है और इसका असर श्वेत रक्तकणिकाओं की संख्या पर पड़ने लगता है।

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